64वीं मंडलीय पेंशन अदालत संपन्न
मंडलायुक्त ने कहा — सेवानिवृत्त कर्मचारियों को कार्यालयों के अनावश्यक चक्कर न लगाने पड़ें
मंडलायुक्त डॉ. लोकेश एम. की अध्यक्षता में आयुक्त कार्यालय स्थित गांधी सभागार में संबंधित सदस्यों एवं अधिकारियों की उपस्थिति में 64वीं मंडलीय पेंशन अदालत संपन्न हुई। पेंशन अदालत में सेवानिवृत्त कर्मचारियों एवं पेंशनरों से संबंधित विभिन्न प्रकरणों की सुनवाई करते हुए उनके त्वरित एवं समयबद्ध निस्तारण के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।
सर्वप्रथम वित्तीय वर्ष 2026-27 के अंतर्गत प्रयागराज मंडल में पेंशन से जुड़े 40 नए प्रकरणों पर सुनवाई की गई। इनमें 39 प्रकरण बेसिक शिक्षा विभाग से संबंधित थे, जो नोशनल वेतन वृद्धि की स्वीकृति एवं तदनुसार पुनरीक्षित पेंशन से संबंधित थे, जबकि एक प्रकरण पारिवारिक पेंशन के भुगतान से संबंधित उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड का था।
बेसिक शिक्षा विभाग से संबंधित प्रकरणों की संख्या अधिक होने एवं इनके निस्तारण में अपेक्षित गति न होने पर मंडलायुक्त ने नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने बेसिक शिक्षा अधिकारी, प्रयागराज को निर्देशित किया कि नए 39 प्रकरणों तथा पूर्व से लंबित 35 पुराने प्रकरणों में से बेसिक शिक्षा विभाग से संबंधित 20 प्रकरणों सहित कुल 59 प्रकरणों का 20 अगस्त तक अनिवार्य रूप से निस्तारण सुनिश्चित करते हुए आख्या उपलब्ध कराएं।
पेंशन अदालत में कुल 16 प्रकरणों का मौके पर निस्तारण किया गया। मंडलायुक्त ने कहा कि पेंशन संबंधी प्रकरणों के निस्तारण में छोटी-छोटी औपचारिकताओं अथवा अभिलेखों की मांग के कारण सेवानिवृत्त कर्मचारियों को अनावश्यक रूप से एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ते हैं।
उन्होंने निर्देशित किया कि जिन अभिलेखों का पूर्व में परीक्षण एवं सत्यापन हो चुका है, उनकी पुन: मांग कर प्रकरण के निस्तारण में विलंब न किया जाए। यदि किसी अतिरिक्त अभिलेख की आवश्यकता हो, तो उसका परीक्षण तत्काल कराते हुए प्रकरण को आगे बढ़ाया जाए, जिससे अनावश्यक समय की बचत हो सके।
उन्होंने कहा कि शासन की मंशा सेवानिवृत्त कर्मचारियों एवं पेंशनरों को अधिकतम सुविधा उपलब्ध कराना है, न कि उन्हें एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय भटकने के लिए विवश करना। पेंशन अदालत में शिक्षा निदेशालय, जिला पंचायत, नगर भूमि सीमांकन, चकबंदी एवं आबकारी सहित अन्य विभागों से संबंधित प्रकरणों की भी सुनवाई की गई।